1948 पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया और POK लेकर चला गया। अब नेहरू ने सोचा कि एक पड़ोसी से युद्ध हो चुका है दूसरे पड़ोसी से युद्ध नहीं होना चाहिए। इसलिए वह अपनी मिल्ट्री मजबूत करने के बजाए चीन से दोस्ती का हाथ बढ़ाया और रक्षामंत्री ने Army का Budget कम कर दिया। लेकिन चीनी सरकार ने अपनी Army के Budget पर ज्यादा से ज्यादा पैसे खर्च किया। जिससे 1950 में चीन ने Tibet पर हमला कर दिया। अब चीनी सेना Tibet में घुसने लगी।
चीन से दोस्ती करने के लिए 1954 में नेहरू ने चीन से पंचशील समझौता किया जिससे चीन अगले 5 साल तक भारत पर हमला नहीं करेगी और न ही भारत चीन पर हमला करेगा।
1959 तक चीन ने पूरा तिब्बत को कब्जा कर लिया था और इसी साल पंचशील समझौता भी खत्म हो गया।
Lt gen premindra singh bhagat ( prem bhagat) ने 31 Pages की Report krishna menon के पास भेजी। उस रिपोर्ट में साफ साफ लिखा था, कि हमारे पास Road नहीं है Border तक जाने के लिया। चीनी सेना हमारे सीमा के अंदर आ रही है और हम कुछ नहीं कर पा रहे है। हमारे पास सांसदों की बहुत किल्लत है, भारतीय सेना के पास हथियार की कमी है, ठंड में पहिनने को कपड़े नहीं है, और गोलियों की कमी है। हमारे पास कोई तकनीक नहीं है जिससे हम चीनी सेना के रेडियो की बात चित को सुन पाए। ऐसा बहुत सी Army की असल कमी को Prem bhagat ji ने इस report में लिखी थी, लेकिन krishna menon ने इस पर द्यान नहीं दिया।
यह रिपोर्ट देने के अगले महीने अगस्त में चीनी सेना ने अरुणाचल प्रदेश के walong पर हमला कर दिया उसके बाद longju इलाके में भारतीय asam राइफल पोस्ट पर हमला कर दिया जिससे भारतीय सेना को पीछे हटना पड़ा और longju चीन के कब्जे में चला गया। फिर चीनी सेना धीरे धीरे भारत में घुसने लगी। अक्टूबर 1959 में उतरी भारत के la paas पर कब्जा कर लिया फिर kongku la पर हमला कर दिया जिससे 9 से 10 भारतीय सैनिक मारे गए।
1960 नेहरू जी की girlfriend Edwina की मौत हो जाती है और नेहरू अपने girlfriend की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए INS Trishul भेजा दिया edwina के शव को समुद्र की गहराई में दफन करने के लिए। अब तक Tibet, Arunachal Pradesh का कुछ इलाका और Ladakh का कुछ इलाका चीनी सेना ने कब्जा कर लिया।
Dalai lama को मजबूरन Tibet को छोड़ना पड़ा और फिर नेहरू ने उन्हें भारत में शरण दी। इस कदम से चीन गुसीया गया। फिर Nehru ने 1961 में चीनी सेना को भारतीय पोस्ट से बाहर निकलने के लिए Forward Policy लागू की, जिससे भारतीय सेना को सख्त आदेश था कि जहां तक भारत की सीमा है वहां तक चीनी सैनिकों को शांतिपूर्वक पीछे किया जाए।
लेकिन भारतीय सेन के पास न ही दंड से रोकने के लिए कोई कपडे थे न ही कोई संसाधन थे। Normal कपड़े और Mangal Pandey वाली Rifle से जिसमें गोलियां भी गिनी चुनी थी यह सब दुविधा के बावजूद भारती सेना चीनी सैनिकों को शांतिपूर्वक पीछे धकेल कर रही थी। इस कदम से चीनी सेना को मौका मिल गया Full-fledged वार करने का अब चीनी सेन तैयार थी, उनके पास मशीन gun था जो america ने भेज था,
अब युद्ध करने के लिए Full Mood में थी बस आदेश की कमी थी, लेकिन भारतीय सेना लड़ना चाहती थी लेकिन सांसदों की कमी के चलते चीनी सेना का मुकाबला नहीं कर सकती थी। यहां भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी से BN Mullik ने नेहरू को कहा कि यह चीनी लोग भारत से पंगा कभी नहीं लेंगे उनकी लड़ने की हिमत नहीं है।
फिर 16 october 1962 विश्वभर में cuban crisis हो गया। अब हाल यह था कि रूस ने अपने परमाणु बम को अमरीक के सिधाने देश Cuba में रखा था और अमरीक ने भी रूस के सिधाने देश ukraine पर परमाणु बम रखा था। उस समय ऐस लग रहा था कि आज नहीं तो कल यह दोनों देश एक दूसरे पर परमाणु बम मार देंगे है। चीन ने सोचा यही मौका है भारत वैसे भी गुटनिरपेक्ष है और अभी इस समय न America मदद करेगा न ही रूस।
4 दिन बाद यानि 20 october को चीनी सेना को Full-fledged War करने का आदेश मिल गया उसके बाद ताबड़तोड़ चीनी सेना ने भारत के अरुणाचल प्रदेश में हमला कर दिया। यहां भारत में हिन्दी चीनी भाई भाई का माहौल चल रहा था।
नेहरू को अनुमान नहीं था कि चीन हमला करेगा। लेकिन चीनी सेना ने भारतीय सेना को बहुत गंभीर तरीके से धोया। क्योंकि 1 भारतीय सेना पर 4 चीनी सेना हमला कर रही थी। लागतार चीनी सेन भारतीय सीमा के अंदर तक आ चुकी थी।
करीब एक महीने की घमासान लड़ाई के बाद उत्तरीभारत का Aksai Chin और पश्चामिभारत का पूरा Arunachal Pradesh चीनी सैनिकों ने कब्जा कर लिया था। अब असम की तरफ चीनी सेन बढ़ रही थी।
फिर नेहरू ने 19 November 1962 को पूरे देश को Radio के माध्यम से कहा कि "Is waqt Assam ke upar, Assam ke darwaze par dushman hai... hamara dil jata hai hamare bhai aur bahinon par jo Assam mein rehte hain... Hum unki poori madad karne ki koshish karenge...
hum is baat ko aakhiri dum tak chalayenge jab tak Assam aur sara Hindustan bilkul dushman se khaali na ho jaaye."
फिर आनंदफानन में Lt Bg kaul ने नेहरू से कहा कि कुछ विदेशी सैनिकों को बुलाए नहीं तो हालात बद से बत्तर हो जाएंगे चीनी सेना लगातार भारत में घुस जा रही है और हम कुछ नहीं कर पा रहे है।
शायद नेहरू ने कहा होगा कि हम तो गुटनिरपेक्ष है ऐसा करना हमारे उसूलों के खिलाफ है। तब आर्मी के अधिकारी ने कहा होगा उसूलों को आग में झोंक दो, Ladakh and Arunachal में कितने मासूम लोग मारे गए और अब Assam की बारी है, ऐसे उसूलों को मान कर क्या फायदा जो हमारे लोगों की जान ले ले आप विदेश से मदद मांगिए।
फिर नेहरू भारत के सभी airlines को रद्द कर दिया गया ताकि उन विमानो का सैनिक इस्तमाल किया जा सके।
अब ऐसा लग रहा था कि चीनी सेना assam, tripura, Mizoram, manipur पर कब्जा कर लेगी।
नेहरू ने पूरे देश में national emergency लगा दी।
फिर नेहरू ने तुरंत America के राष्ट्रपति kennedy को पत्र लिखा, चीनी सेना ने Arunachal Pradesh पर कब्जा कर लिया है और Ladakh के ज्यादातर हिस्से पर कब्जा कर लिया है अब वो chushul पर भी कब्जा करने वाले है, भारत को चीन से निपटने के लिए Fighter jet की जरूरत है।
फिर कुछ घंटे बाद नेहरू ने दूसरा पत्र लिखा, पहल पत्र भेजने के कुछ घंटा में पूरे ब्रह्मपुत्र घाटी पर गंभीर खातर पैदा हो गया है अगर तुरंत कुछ नहीं किय गया तो पूरा Assam, Tripura, Manipur और Nagaland चीन के हाथ में चला जाएगा। अब चीनी सैनिकों से निपटन के लिए मुझे 12 squadron चाहिए, जबतक इन जहाजों को हमारे सैनिक नहीं चला सकते तबतक इन्हें अमेरिकी pilot को चलाना होगा, अमेरिकी जहाज का इतमाल सिर्फ भारतीय शहरों और ठिकानों की सुरक्षा के लिए किया जाएगा। लेकिन Tibet के अंदर हवाई हमला भारतीय वायु सेना करेगी इसके लिए B47 bomber जहाजों के 2 squadron चाहिए। मैं तुम्हें यकीन दिलाता हु कि इस हथियारों का इस्तेमाल सिर्फ चीन के लिए होगा पाकिस्तान के लिए नहीं। मुझे 350 Fighter jet चाहिए और उन्हें संभालने के लिए 10000 Support Staff भी चाहिए।
यह दोनों पत्र नेहरू पहले दिल्ली में बैठे अमेरिका के राजदूत को भेजते इसका बाद राजदूत इन पत्रों को kennedy के पास भेजता।
अगले ही दिन 20 नवंबर को अमेरिकी राजदूत John Kenneth Galbraith ने kennedy को पत्र लिखा जिसमें उन्होंने कहा कि आज का दिन दिल्ली में सबसे बड़ा भय का दिन था आज मैने लोगों का हौसला टूटते हुए देखा। अब आप तुरंत हथियार भेजिए और 12C 130 विमान भेजिए और 7व बेड़ा को बंगाल की खाड़ी की तरफ रवाना कर दो। Kennedy ने तुरंत galbraith कि बात मान ली और 7 वे बेड़े को बंगाल की खाड़ी की तरफ रवाना कर दिया।
नेहरू के दोनों पत्रों की मांगों को जांचने परखने के लिए kennedy ने Averell Harriman के नेतृत्व में 2 दर्जन अधिकारियों को विमान से दिल्ली भेजा। Averell Harriman 22 नवम्बर को दिल्ली पहुंचे। लेकिन 21 नवम्बर 1962 को चीनी सेना न युद्ध विराम की घुसना कर दी। अरुणाचल प्रदेश को छोड़ कर भरता कि सीमा से 20 किलोमीटर बेचे चले गए। लेकिन अक्साई चीन से पीछे नहीं गए। हो सकत है इसमें चीन और America की साठ गांठ हो।
लेकिन चीन के पास पूरा पंचमी भारत पर कब्जा करने का मौका था लेकिन चीन को फायदा से ज्यादा नुकसान था क्योंकि दंड का मौसम आ रहा था इसलिए चीनी सेना को Assam में ले जाना मुश्किल था और जितने देर युद्ध चलत उतना अमेरिका के हथियार बिकते इससे अमरीका और अमीर बन जाता इसलिए चीन, Arunachal Pradesh से पीछे हट गया लेकिन Aksai Chin से पीछे नहीं हटा।
यहां भारत में अभी भी national emergency लागू थी। सारा Power केंद्र के पास था।
पूरा देश नेहरू से नाराज था एक दिन parliament में एक विशेष छत्र बुलाया गया उस छत्र में सवाल उठा कि हमने चीनी सेना से Aksai Chin जो कि भारत का हिस्सा है उसको वापस क्यों नहीं लिया। नेहरू जी आप तो प्रधानमंत्री आपका खून नहीं खोलता कि हमारी जमीन का 38000 sq km इलाका चीनी सेना ने कब्जा कर रखा है। नेहरू उठे और उन्होनें कहां की अक्साई चीन वो जमीन बंजर है उसमें घास का एक तिनका भी नहीं उगता है इसलिए उसक लिए क्या लड़ना। तब वही पर एक मोफ़ट संसद थे महावीर त्यागी उन्होंने नेहरू को जवाब दिया कि नेहरू जी आपके सिर पर भी एक बाल भी नहीं उगता तो क्या आप अपने सिर को चीन को दे देंगे।
इस बात से नेहरू की parliament में बहुत मजाक उड़ा और मीडिया में छापा तो देश के लोगों वैसे ही नेहरू से नाराज थे। जब यह कारनामा लोगों तक बहुचा तो लोगों ने नेहरू का खूब मजाक उदया।
नेहरू की छवि बेकार हो रही थी।
अपनी छवि सुधारने के लिए रक्षा मंत्री कृष्ण मेनन को इस्तीफा देने पे मजबूर कर दिया।
Krishna menon ने इस्तीफा दिया।
फिर नेहरू ने यशवंतराव को रक्षा मंत्री बना दिया।
फिर भी लोगों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा था।
अब भारत में जितने भी चीनी लोग रहते थे जिनका चीन के युद्ध से दूर दूर तक नाता नहीं था उनके घर पे सेना आती है और उन्हें कहती है कि कुछ कपड़े और पैसे लेलो लेकिन 500 रुपए से ज्यादा नहीं और अभी हमारे साथ चलना होगा। सभी भारतीय चीनी लोगों को एक ट्रेन में बैठाया गया guwahati में और train को kota ले जाएगा पूरे रास्ते में जहां जहां Train रोकती वहां पर लोग ट्रेनों पर चप्पल और पत्थर मारते क्योंकि ट्रेन पे लिखा था Enmey train, सभी लोग नारे लगाते गद्दार चीनी लोग वापस जाओ।
सभी लोगों को deoli camp में रख दिया गया। करीब 5 साल से ज्यादा समय तक चीनी लोगों को deoli में रखा गया। ऐस लग रहा था सरकार उनके बार में मानो भूल गई हो।
लेकिन 1962 में भारतीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर था पूरा देश की एक ही मांग थी अक्साई चीन।
अभी भी पूरा देश नेहरू को गाली दे रहा था लोगों का गुस्सा संत करने के लिए नेहरू ने दिल्ली में संगीत प्रोग्राम रखा जिसमें लता मंगेशकर जी ने मेरे वतन के लोगों वाला गाना सुनाया। यह गाना सुन ने के बाद लोग रोने लगे और सारा दुख भूल गए।
हमेशा जब जब पावर में रहने वाले आदमी से गलती होती है तब वो लोगों के भीतर गुस्से को सांत करने के लिए उन्हें रुला था है, और रुलाने का आसान तरीका होता है कि किसी emotional गाना, कवि या कोई धार्मिक कथा की जाए,
जैसे 1962 में नेहरू को पता था कि मेरी गलती है इसलिए उन्होंने लातामंगेशकर को 27 january 1963 को दिल्ली में मेरे वतन के लोगों वाला गाना गवाया। सभी लोग रोने लगे और फिर कोई Aksai Chin के बारे नहीं बोला।
आप सोच कर देखिए आपका कोई जमीन दूसरा आदमी जबरदस्ती कब्जा ले और आप उसके लिए गाना गाए, उसको रामायण दिखाए, फिर रोने लगे।
ऐसा पहलीबार नहीं हुआ है,
ऐसी ही bilkis बनो के case में भी हुआ था, जब bilkis bano का रेप हुआ तो वह supremecourt गई, वो लड़ी और जीती भी, लेकिन राजीव गांधी ने supreme court का आदेश पलट दिया। तब पूरा देश ने कहा कि गलता हुआ है, सभी लोग राजीव गांधी से नफरत करने लग थे।
अब पूरे देश में राजीव गांधी हया हाय के नारे लगने लगे। तब राजीव गांधी ने पूरे देश में tv पर रामायण चालू कर दिया जिससे लोग सांत हो गए।
ऐसी ही covid के समय नेताओं से एक से एक बड़ी गलती हो रही थी, पूरी दुनिया covid का vaccine दून रही थी और हम जुगाड दून रहते, मोदी बोलते है ताली बजावा तो corna virus चला जाएगा, इससे नहीं गया तो
बोलते है दिया जलाओ इससे Virus भाग जाता है, उसके बाद बोलते है 10 मिनट तक Light बंद करो इससे coronavirus चला जाएगा, लेकिन यह सब से coronavirus खत्म नहीं हो रहा था। अब देश का प्रधानमंत्री ऐसी उटपटांग हरकते करेगा तो लोग नाराज तो होंगे। अब अपनी हार न मान कर, देश के लोगों को बहलाने के लिए रोज सामको रामायण सीरियल चालू कर दिया। लोगों का गुस्सा संत हो गया। सब भूल गए।
ऐसी ही जब epistin files ke video सामने आने लगे बहुत से नेताओं और अमीर लोगों के नाम आने लगे तब नेताओं ने क्या किया ईरान पर युद्ध कर दिया। युद्ध को इतना लंबा खींचा गया कि लोगों epistin files ke बारे में भूल ही गए।
ऐसी बहुत सी घटना है जब जब पावर में आदमी से गलती होती है तब तब ऐसा ही होगा, कभी युद्ध होगा, कभी रामायण चलेगा, कभी रोने वाला गाना चलेगा,
और अगर एक ट्रेन में पानी बेचने वाला अपना मुनाफा ज्यादा करने के लिए 14 MRP की BOTTLE को 20 रूपये बोलता है तो हम पूरा TRAIN में हंगामा कर देते है, उसकी शिकायत करते, social media पर post करते,
लेकिन जब नेता या कोई बहुत पैसे वाला आदमी गलती करता है तो हम चुप हो जाते है
मेरे हिसाब से गलती उस ट्रैन में पानी की बोतल बेचने वाले की भी है और ब्रष्टाचार करने वाले नेता की भी है, शिकायत दोनों की होनी चाहिए।
अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इन नेताओं की चाल न फंसे और अपने अधिकारों को जाने।