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Ravindra Kaushik (Indian Spy)

11 मई 2026 by
Rahul Maurya
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१९७४ भारत ने परमाणु बॉम्ब का सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया था। इस परीक्षण से नाराज पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने कसम खाई कि हम घास की रोटी खा लेंगे लेकिन हम भी परमाणु बॉम्ब बनाकर रहेंगे। अब पाकिस्तान ने १९७६ में A.Q. Khan Research Laboratories बनाई और अब्दुल कादिर खान के साथ मिलकर परमाणु बॉम्ब के परीक्षण जोरों-शोरों से होने लगे।

यह भारत में १९७५ में जब इंदिरा गांधी को लगा कि उनकी सत्ता जाने वाली है तब उन्होंने भारत में Emergency लगा दी। और भारत के लोगों से कहा कि यह Emergency इसलिए लगी है कि हमें लगता है कि भारत में आंतरिक माहौल ठीक नहीं है। इस Emergency के नाम पर इंदिरा गांधी ने सभी विपक्षी पार्टियों के लोगों को जेल में डाल दिया। सिर्फ विपक्षियों को ही नहीं, जो भी आदमी इंदिरा गांधी के खिलाफ बोलता था या सवाल पूछता था उसे जेल में डाल दिया जाता।

इस Emergency से सारे विपक्ष के लोग नाराज़ थे और उसका बदला भी लेना चाहते थे इसलिए जब Emergency खत्म हुई तो इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री पद से हटाकर १९७७ में मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री बना दिया गया।

मोरारजी देसाई इंदिरा गांधी से सख्त नफरत करते थे। सिर्फ उनसे ही नहीं बल्कि उनके हर एक फैसले से नफरत करते थे।

इसलिए जैसे ही मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने उन्होंने पाकिस्तान से दोस्ती करने का फैसला किया और कहा कि हम अब से लड़ाई करने की कोई आवश्यकता नहीं है। हम जब एक-दूसरे की जरूरत की कदर करेंगे और प्रेम से व्यापार करेंगे तो लड़ाई करने की कोई आवश्यकता नहीं है। मैं सिर्फ बोलता नहीं हूं, करके दिखाता हूं।

Israel और North Korea के बीच कट्टर दुश्मनी थी। Kim Jong Un के दादा किम Kim Song Ju, Israel से नफरत करते थे क्योंकि शीत युद्ध में इजरायल अमेरिका का साथ दे रहा था और North Korea अमेरिका के विरोध में था। Kim Song Ju इजरायल को अमेरिका का पपेट बोलते थे और आज भी वही दुश्मनी Kim Jong Un भी कर रहा है। इसलिए Israel नहीं चाहता था कि उसका दुश्मन North Korea परमाणु सम्पन्न देश बने।

इसी बीच १९७६ में जब पाकिस्तान ने A.Q. Khan Research Laboratories खोली तभी से Israel की ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद A.Q. Khan के पीछे पड़ गई।

१९७७ में पाकिस्तान में प्रधानमंत्री Zulfikar Ali Bhutto का Zia-ul-Haq ने तख्तापलट कर दिया और खुद पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बन गया। और फिर North Korea गए। और फिर वापस आने के बाद A.Q. Khan Research Laboratories में काम जोरों-शोरों से होने लगा। अब Mossad का शक यकीन में बदल रहा था।

बहरहाल Mossad ने पता किया कि ये A.Q. Khan, परमाणु बॉम्ब बनाने की तकनीक में काम आने वाली P1 Centrifuges Technique, Germany से चुराकर पाकिस्तान लेकर आया है।

यह मोरारजी देसाई ने पहली फुर्सत में भारत के R.A.W का Budget 40% कम कर दिया। और लोगों से कहा कि ये R.A.W Agent इंदिरा गांधी के Praetorian Guard थे। जब-जब R.N Kao प्रधानमंत्री के Office जाते तब-तब लोग उन्हें हत्यारा बोलते। इस बात से R.N kao ने मोरारजी देसाई से कहा कि जब आपको ही हमारी कदर नहीं है फिर हम भी काम नहीं कर सकते इसलिए मैं आज और अभी इस्तीफा देता हूं।

१९७७ में R.N Kao ने इस्तीफा दिया और उस समय उन्हें पाकिस्तान से खबर आ रही थी कि पाकिस्तान Kahuta में परमाणु बॉम्ब बनाने वाला है, बस कुछ महीनों में बना देंगे। लेकिन हमें यह नहीं पता है कि वह सच में परमाणु बॉम्ब ही बना रहा है या नहीं।

China भी पाकिस्तान को परमाणु बॉम्ब बनाने का Blueprint देने वाला था।

अब Mossad को पता चल गया था कि पाकिस्तान परमाणु बॉम्ब बना रहा है लेकिन ऊपर-ऊपर से अभी भी 100% Confirm नहीं था। इसलिए Mossad ने R.A.W Agent को यह Information दी और कहा अगर आप किसी तरह Confirm कर दो तो हम अभी Strike कर सकते हैं जिससे पाकिस्तान का Kahuta Nuclear Enrichment Plant खत्म हो जाएगा।

फिर R.A.W ने बहुत कोशिशें कीं कि Lab के अंदर चले जाएं लेकिन बहुत Tight Security थी इसलिए R.A.W Agent ने देखा कि सारे Scientist एक Barber की Shop में जा रहे हैं। R.A.W Agent को पता था कि कोई भी Uranium के आसपास रहेगा तो उसके बाल या कपड़ों में उसका Uranium मिलेगा इसलिए जो Scientist अपने बाल काटने के लिए Barber Shop में जाता था तो R.A.W Agent उस Scientist के बाल ले आते। फिर R.A.W Agent ने उन्हें टेस्ट किया तो पता चल गया कि बाल में सच में Uranium है।

R.A.W Agent ने एक Scientist को भी अपने साथ मिला लिया था जिससे वो $१०००० में A.Q Khan Lab का Blueprint दे देता। अब R.A.W Agent ने Mossad को बता दिया लेकिन एक समस्या थी कि Israel से Direct लड़ाकू विमान पाकिस्तान के Kahuta में Strike नहीं कर सकता था। उन्हें Refuelling के लिए जामनगर Airbase पर उतरना पड़ेगा इसलिए Mossad ने R.A.W Agent को कहा कि आप अपने प्रधानमंत्री से बात कीजिए और हमारी Refuelling की व्यवस्था कीजिए।

R.A.W Agent ने मोरारजी देसाई को फोन किया और सारे प्लान समझा दिए लेकिन मोरारजी देसाई ने कहा कि यह गलत बात है। लड़ाई-झगड़ा करने से हमारा पड़ोसी देश से संबंध खराब हो जाएगा। हम ऐसी परमिशन नहीं दे सकते और आइंदा से मुझे फोन मत करना। मोरारजी देसाई ने परमिशन नहीं दी लेकिन फिर जिया-उल-हक का फोन आ गया।

Zia-ul-Haq ने पूछा कि आप Media में बोल रहे थे आप अपना पेशाब पीते हैं, कैसे और कब पीते हैं आप। मोरारजी देसाई ने कहा कि देखो Zia-ul-Haq ज्यादा फ्री मत हो। मुझे पता है कि तुम Kahuta में क्या-क्या कर रहे हो। देखो ये अच्छी बात नहीं।

अब Zia-ul-Haq बौखला गया। उसने तुरंत एक Meeting बुलाई और कहा कि हम क्या कर रहे हैं क्या नहीं, उन भारतीयों को सब पता है लेकिन हम सब अपना-अपना पकड़कर बैठे हैं। मुझे वो गद्दार आदमी चाहिए जो ये सब बातें पाकिस्तान से भारत भेज रहा है।

अब पाकिस्तान की पुलिस, सेना सबने मिलकर R.A.W Agent को चुन-चुनकर मारना शुरू किया।

Ravindra Kaushik भी उस समय पाकिस्तान में ही थे। उन्हें लेने के लिए एक R.A.W Agent आया था जिसका नाम Inyat Masiha था लेकिन उसे भी पकड़ लिया गया। कुछ दिनों तक Inyat Masiha को बुरी तरह Torture किया गया। उसने Ravindra Kaushik का पता बता दिया। १९८३ में Ravindra Kaushik पकड़े गए। १९८५ में Court ने फांसी की सजा सुना दी लेकिन बाद में सजा कम कर उम्रकैद कर दी।

उन्हें पाकिस्तान के Sialkot जेल में रखा गया जहां उनके नाखून निकाले गए, एक-एक दिन में उनकी एक-एक उंगलियां काटी गईं, बाल नोचे गए, पैर काट दिए गए, हाथ काट दिए गए, फिर भी Kaushik जी ने कुछ नहीं बताया।

२००१ में  Mianwali Central Jail में Ravindra Kaushik जी की T.B और दिल की बीमारी से मौत हो गई। लेकिन भारत ने कभी भी Ravindra Kaushik को अपना Agent नहीं माना।

Ravindra Kaushik की मां Amla Devi ने बताया की उनके परिवार को ५०० से २००० रुपए मिलते हैं लेकिन उन्होंने वाजपेयी जी को पत्र भी लिखा था कि आज अगर Ravindra Kaushik जिंदा होता तो पाकिस्तान की Army का Chief Officer होता और भारत की और भी मदद करता।

Ravindra Kaushik जी के भाई R.N Kaushik ने अटल जी से Request भी की कि हमें पैसे नहीं चाहिए बस Ravindra Kaushik को सम्मान मिलना चाहिए था। जब Ravindra जिंदा था तब उसने राजस्थान में २०००० सैनिकों की जान बचा ली थी और आज भी होता तो बचा लेता।

यह बात सच है कि हमारे लिए भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी R.A.W ऐसी सुरक्षा करती है जिसकी वजह से पता नहीं कितनी सेनाओं और कितने ब्लास्ट रोके गए हैं लेकिन उन्हें कोई सुविधा, न कोई सम्मान दिया जाता है। कोई भी देश उन्हें चाहकर भी सम्मान नहीं दे सकता क्योंकि सभी देश एक-दूसरे के ऊपर निगरानी रखते हैं। अगर किसी देश को पता चल जाए कि भारत देश उसके ऊपर निगरानी रख रहा है तो वो कभी भी हमसे व्यापार या दोस्ती नहीं करेगा। इसीलिए सब लोग यह Job नहीं कर सकते। एक गुमनाम सी जिंदगी होती है। आपके अपने परिवार को ही नहीं पता होता कि आप क्या कर रहे हो।

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